स्वामी प्रसाद मौर्य 22 फरवरी को कर सकते हैं नई पार्टी का ऐलान, अखिलेश यादव से नाराजगी का कारण जानिए

Hindi | 19 February, 2024 | 10:09 AM
સાંજ સમાચાર

स्वामी प्रसाद मौर्य अब अपनी पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। पिछले दिनों उनकी नाराजगी सामने आई। स्वामी मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। अब उनके अगले कदम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्वामी प्रसाद मौर्य के ऐलान से सपा को बड़ा झटका लग सकता है।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाद हड़कंप मचा हुआ है। लोकसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के भीतर विवाद लगातार गहरा रहा है। विपक्ष की राजनीति को एक पाले में लाने की कोशिश लगातार की जा रही है। कांग्रेस की ओर से इस दिशा में पहल हो रही है। लेकिन, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत छोड़ो यात्रा के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार टूटता दिख रहा है।

सबसे बड़ी टूट समाजवादी पार्टी में होती दिख रही है। पिछले दिनों अपना दल कमेरावादी की नेता और सपा विधायक पलवी पटेल की नाराजगी सामने आई। राज्यसभा चुनाव से पहले इस नाराजगी ने सपा अध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसके साथ साथ दो बड़े इस्तीफा हो गए।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने पहले इस्तीफा दिया। बाद में राष्ट्रीय महासचिव सलीम शेरवानी ने भी इस्तीफा दे दिया है। इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि 22 फरवरी को स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। इस सूचना ने यूपी की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद समाजवादी पार्टी के भीतर हलचल तेज हो गई है। कई नेताओं ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से कई नेताओं ने स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफा न स्वीकार करने की अपील की है। दरअसल, यूपी चुनाव 2022 के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी से जुड़े थे। इसके बाद उनके करीबी नेताओं ने भी सपा ज्वाइन कर ली। अब स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य अपने रुख में बदलाव करते नहीं दिख रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से आ रही खबर को सच माना जाए तो स्वामी प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद उनकी नई पार्टी से कई सीनियर नेता जुड़ सकते हैं। अखिलेश यादव को बड़ा झटका लग सकता है। स्वामी मौर्य एक बड़ी राजनीति करते दिख रहे हैं। दरअसल, बहुजन समाज पार्टी से कमजोर होने के बाद दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाने की होड़ तेज हो गई है। भाजपा मुफ्त राशन योजना के साथ इस वर्ग के वोट बैंक को साधती दिख रही है। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य के रुख से अखिलेश यादव के पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीएफ फ्रंट में बड़ी डेंट लग सकती है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी राजनीति बहुजन समाज पार्टी के नेता के तौर पर शुरू की थी। 2 जनवरी 1954 को प्रतापगढ़ में जन्मे स्वामी प्रसाद मौर्य ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा पूरी की। 1996 से स्वामी प्रसाद मौर्य चुनावी राजनीति में आए। उन्हें एक समय बसपा सुप्रीमो मायावती का सबसे अधिक करीबी उन्हें माना जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में अब तक चार बार पाला बदला है। लोक दल से राजनीति की शुरुआत करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य जनता दल, बसपा, भाजपा और सपा तक का सफर तय किया है। अगर वे नई पार्टी का ऐलान करते हैं तो यह उनकी पांचवां मौका होगा।

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