हरिद्वार कुंभ 2021 : कुंभ अवधि को लेकर सदियों पुरानी है संन्यासियों और बैरागियों की रार, तस्वीरें

20 April 2021 07:58 AM
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कुंभ अवधि को लेकर नागा संन्यासियों और बैरागी संतों का विवाद सदियों पुराना है। भले ही शिव और राम एक-दूसरे के भक्त हों, लेकिन शैव संन्यासी और रामानंदी वैष्णव बैरागी अनेक कुंभ मेलों में संघर्ष करते आए हैं। संन्यासियों के वर्चस्व वाले हरिद्वार में बैरागियों को कई बार कुंभ पर स्नान नहीं करने दिया गया। अनेक बार वे हरकी पैड़ी पर कुंभ नहीं नहा पाए और चंडी घाट पर नीलधारा में स्नान कर लौट गए। बाद में तो बैरागियों ने हरिद्वार आने के बजाय वृंदावन में कुंभ मनाना शुरू कर दिया था। आज भी बैरागी हरिद्वार आने से पहले उस समय स्थापित परंपरा का पालन करते हुए वृंदावन में एक महीने का कुंभ मनाते हैं। नासिक में भी संन्यासियों के स्नान त्रयंबकेश्वर में होते हैं और नासिक की गोदावरी में केवल बैरागी अखाड़ों का स्नान होता है। दोनों शाखाओं के संत एक स्नान में भी साथ-साथ नहीं आते। वर्ष 1760 के हरिद्वार कुंभ में दोनों के बीच हिंसक संघर्ष हुए थे। भीषण हिंसा में दोनों संप्रदायों के हजारों साधु मारे गए थे। उस दौरान गरीबदासी संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य गरीबदास स्वयं हरिद्वार में थे। इस हिंसक घटना से वे इतने आहत हुए कि वहृदेग्रन्थ की रचना हरिद्वार के गंगा तट पर की। इसमें उन्होंने दोनों संप्रदायों के प्रति कटु शब्दों का भी प्रयोग किया।


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