Bharat Jodo Yatra: राहुल गांधी की यात्रा से मध्य प्रदेश कांग्रेस कितनी मजबूत हुई, क्या 2023 में मिलेगा फायदा?

02 December 2022 06:33 PM
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मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने अपनी यात्रा में खंडवा में ओंकारेश्वर और उज्जैन में महाकाल मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा कर सॉफ्ट हिंदुत्व का संदेश दिया। देश में बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे पर ही सत्ता में आई और कांग्रेस को हिंदू विरोधी बता सत्ता से दूर करती आई है। अब कांग्रेस भी बीजेपी की राह पर हिंदुत्व के मुद्दे पर खेल रही है।

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का मध्य प्रदेश में 10वां दिन है। यात्रा अपने अंतिम चरण में है और दो दिन बाद राजस्थान में दाखिल हो जाएगी। यात्रा के पहले हिंदी भाषी मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने सॉफ्ट हिंदुत्व और सभी वर्गों को साधने की कोशिश की। प्रदेश की टॉप लीडरशिप ने भी एकजुटता दिखाने का प्रयास किया। वहीं, राहुल की यात्रा को जनता से मिले समर्थन से कार्यकर्ता भी उत्साहित हैं। सवाल यह है कि क्या 2023 में कांग्रेस को इसका फायदा मिलेगा।

मध्य प्रदेश में राहुल गांधी ने अपनी यात्रा में खंडवा में ओंकारेश्वर और उज्जैन में महाकाल मंदिर में ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा कर सॉफ्ट हिंदुत्व का संदेश दिया। देश में बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे पर ही सत्ता में आई और कांग्रेस को हिंदू विरोधी बता सत्ता से दूर करती आई है। अब कांग्रेस भी बीजेपी की राह पर हिंदुत्व के मुद्दे पर खेल रही है। दरअसल पार्टी के नेताओं को लगता है कि इससे कांग्रेस को फायदा होगा। उनका कहना है कि पार्टी को अल्पंसख्यक की तरफ ज्यादा झुकाव उनको बहुसंख्यक वोटरों से दूर ले गया।

भारत जोड़ो यात्रा का रूट मालवा-निमाड़ रखा गया। यहां आदिवासी वर्ग का प्रभाव ज्यादा है। इसके साथ ही सभी वर्गों को साधने की कोशिश की गई। यह वजह है कि राहुल टंट्या भील के गांव और महू में बाबा साहब अंबेडकर की जन्मस्थली गए। 2003 से आदिवासी वर्ग बीजेपी के साथ था, लेकिन 2018 में छिटककर कांग्रेस के पास चला गया। जिसका खामियाजा बीजेपी को सत्ता गंवाकर भुगतना पड़ा। कांग्रेस को पूरा जोर इस बात है कि आदिवासी वर्ग उनके साथ ही बना रहे।

राहुल गांधी की यात्रा के दौरान प्रदेश लीडरशिप न सिर्फ एक्टिव दिखी बल्कि उन्होंने एकजुटता का भी संदेश दिया। इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने खुद को कमलनाथ का संकेत में राइट हैंड बताया। दोनों के बीच जुगलबंदी कार्यकर्ताओं के उत्साह के लिए जरूरी है। इससे पार्टी में गुटबाजी की अटकलों पर विराम लगा। हालांकि, स्थानीय स्तर पर अव्यवस्था और बिखराव की बात भी सामने आ रही है।

राहुल गांधी की यात्रा जिस क्षेत्र से गुजरी है, वहां कांग्रेस के पास आज भी कोई बड़ा चेहरा नहीं है। उस इलाके में ओबीसी समाज से आने वाले अरुण यादव अभी साइड हैं। राहुल गांधी की यात्रा के दौरान उनसे जिम्मेदारी छीनकर निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा को दे दी गई थी।

वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटैरिया का कहना है कि पिछले दो साल से कांग्रेस आरोप लगाती आ रही है कि बीजेपी ने उसके हाथ से सत्ता छीन ली, लेकिन इसे प्रमाणित करने के लिए कांग्रेस प्रदेश में कोई आंदोलन नहीं खड़ा नहीं कर पा रही। प्रदेश में कांग्रेस बिखरी-बिखरी रही। हालांकि यात्रा ने कांग्रेस के अंदर के ठंडेपन को दूर किया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा है, लेकिन इस यात्रा से आगामी विधानसभा चुनाव में कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है। यात्रा के दौरान जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, उनमें जनता को जुड़ाव नहीं दिख रहा है। उलटा इस यात्रा का एक फायदा बीजेपी को होता दिख रहा है कि शिवराज सिंह चौहान से लेकर तमात नेता आदिवसायों को जोड़ने के लिए सक्रिय हो गए। मुख्यमंत्री लगातार आदिवासी के बीच जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी का कहना है कि राहुल गांधी कहते हैं कि उनकी यात्रा राजनीतिक नहीं है। तो फिर कांग्रेस राजनीतिक और चुनाव से जुड़े विषयों की बात यात्रा में क्यों करती है। दूसरा राहुल गांधी की यात्रा पूरी तरफ फ्लॉप यात्रा है। इसलिए बॉलीवुड के पिटे हुए कलाकारों को लाकर या कभी कभी बीजेपी के बड़े नेताओं पर झूठे आरोप लगाकर मीडिया में जगह पाने की कोशिश की गई। जहां तक चुनाव में फायदे की बात है तो वह तब होता, जब राहुल गांधी जब कमलनाथ सरकार की वादा खिलाफी के उत्तर देते और जनता से क्षमा याचना करते।

कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने कहा कि भाजपाई विचारधारा और सरकार द्वारा किए जा रहे तमाम नकारात्मक रवैए के बावजूद बिना उनके किसी सहयोग के जनसैलाब उमड़ा। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और उसके संदेश को जन जन तक पहुंचाने के लिए 100 प्रतिशत से भी अधिक सफल हुई है। यात्रा से राहुल जी जनता के दिलों में बैठ गए हैं। हम इससे बेहद प्रसन्नता की अनुभूति महसूस कर रहे हैं।


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